Ek Aur Kitaab Likhunga

एक और किताब लिखूंगा, उसमे ज़्यादा नही लिखूंगा.. बस चलती साँसों का हिसाब लिखूंगा, उनके बीच आई हर याद लिखूंगा.. बहते रक्त की फरियाद लिखूंगा, जो बह ना पाया वो दर्द लिखूंगा.. कटी हुई ज़बान का अफ़साना लिखूंगा; जो कह ना सका वो जज़्बात लिखूंगा.. खोई हुई नज़रों का ठिकाना लिखूंगा, जो देख ना पाया … Continue reading Ek Aur Kitaab Likhunga

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