Poetry

Savaal Hai (Poem)

दर वीरान है और दस्तक का सूना हाल है,
शहर मे मकान तो है, पर घर का सवाल है|

खुले उजाले मे बस्ते अंधेरे का ख़याल है,
हँसना आता तो है, पर हँसी खिलने का सवाल है|

रात को नींद नही पर दिन से लड़ने की मज़ाल है,
सीने मे दिल तो है, पर धड़कन का सवाल है|

रास्ते है कहीं, और अकेले चलने का काल है,
लोग पहचानते तो है, पर अपनो का सवाल है|

ज़िंदगी का यह एक ऐसा मायाजाल है,
तन्हाई तो है, पर जीने का सवाल है|

– Funadrius

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Poetry

Mile Jo Hum Kabhi (Poem)

मिले जो यूँ हम तुम फ़साने में,
जानो अब बहुत हो चुका सबर
चुप हो तुम, चुप हूँ मैं,
अब हमें किसी और की क्या ख़बर!

मिले जो लब कभी यादों में,
जैसे लहर से लहर मिलती हो अगर,
ख़ुश हो तुम, ख़ुश हूँ मैं,
अब हमें चाहिए तो बस इक क़ब्र!

मिले जो क़दम कभी ख़यालों में,
चलें हम साथ साथ हर डगर,
आगे आगे तुम, पीछे पीछे मैं,
किसी की चिंता क्यूँ हो भला मगर?

मिले जो हम अगर कभी हक़ीक़त में,
मानो मेहरबानी हुई इस क़दर,
मोहब्बत में तुम, इश्क़ में मैं,
जन्नत वही हो, हो हम साथ जिधर!

  • Funadrius
Poetry

Ek Khoj (Poem)

किसीसे मन की बात कहकर भी;
तन्हाई का इक इक पल सताता है|
भीड़ के बीच रहकर भी;
मुझे अकेला रहना आता है|

रहता है वो किसमे, कैसे, कहाँ;
कौन जाने प्यार कहाँ बस्ता है?
क्या अकेलेपन से भरे जहाँ मे;
वो लूका छिप्पि खेल कर हस्ता है?

ढूंढता हूँ उसे हर जगह;
जला धूप मैं, देखे हर साए|
ना जान पाया मई वो वजह;
क्यू वह मुझे ऐसे सताए|

मिला वो कहीं पल दो पल;
पूछना चाहा उसे सवाल कहीं|
जवाब मिले कोई, मिले कुछ हल,
पर खोज मेरी रही वहीं के वहीं|

जो लफ्ज़ उसने कहे;
वह सिर्फ़ मुझे घाव दे गये|
जो लफ्ज़ उसने ना कहे;
वह मेरी जान ले गये!

– Funadrius