Savaal Hai (Poem)

दर वीरान है और दस्तक का सूना हाल है,
शहर मे मकान तो है, पर घर का सवाल है|

खुले उजाले मे बस्ते अंधेरे का ख़याल है,
हँसना आता तो है, पर हँसी खिलने का सवाल है|

रात को नींद नही पर दिन से लड़ने की मज़ाल है,
सीने मे दिल तो है, पर धड़कन का सवाल है|

रास्ते है कहीं, और अकेले चलने का काल है,
लोग पहचानते तो है, पर अपनो का सवाल है|

ज़िंदगी का यह एक ऐसा मायाजाल है,
तन्हाई तो है, पर जीने का सवाल है|

– Funadrius

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Ek Khoj (Poem)

किसीसे मन की बात कहकर भी;
तन्हाई का इक इक पल सताता है|
भीड़ के बीच रहकर भी;
मुझे अकेला रहना आता है|

रहता है वो किसमे, कैसे, कहाँ;
कौन जाने प्यार कहाँ बस्ता है?
क्या अकेलेपन से भरे जहाँ मे;
वो लूका छिप्पि खेल कर हस्ता है?

ढूंढता हूँ उसे हर जगह;
जला धूप मैं, देखे हर साए|
ना जान पाया मई वो वजह;
क्यू वह मुझे ऐसे सताए|

मिला वो कहीं पल दो पल;
पूछना चाहा उसे सवाल कहीं|
जवाब मिले कोई, मिले कुछ हल,
पर खोज मेरी रही वहीं के वहीं|

जो लफ्ज़ उसने कहे;
वह सिर्फ़ मुझे घाव दे गये|
जो लफ्ज़ उसने ना कहे;
वह मेरी जान ले गये!

– Funadrius

Is Sheher Ne Baarish Ko Nahi Bhula

ISNBKNB

 

इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

गर्मी से रिहाई का,
बोझ उतारना नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

बादलों के आशीर्वाद का,
शुक्रिया अदा करना नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

चहेरे पे पड़ती बूँदो का,
मज़ा लूटना नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

काग़ज़ की नैया को,
इठलाते देख हसना नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

गर्म चाए और पकोडे का,
स्वाद अब तक नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

बरसते हुए पानी मे,
यादें बरसाना नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

गीली मिट्टी की खुश्बू को,
महसूस करना नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

कंबल ओढकर सोने का,
सुकून अब तक नही भूला|
इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

इस शहेर ने बारिश को नही भूला!

– Vishvaraj Chauhan (Funadrius)