Main Yahaan Aya Hoon

मैं यहाँ अपने आप को खोजने आया हूँ,
उसके शहर की एक शाम चुराने आया हूँ!

मैं यहाँ अपने गीत सुनाने आया हूँ,
उसकी शाम मे एक पल बिताने आया हूँ!

मई यहाँ अपने ख्वाब साकार करने आया हूँ,
उस एक पल मे ज़िंदगी जीने आया हूँ!

मैं यहाँ अपना मॅन भरने आया हूँ,
अपनी ज़िंदगी मे उसके रंग भरने आया हूँ!

मैं यहाँ एक मासूम होली खेलने आया हूँ,
उन्ही रंगों को उसके चेहरे पे लगाने आया हूँ!

मई यहाँ कुछ महसूस करने आया हूँ,
उसके चेहरे पे गिरी बारिश की बूँदो को निहारने आया हूँ!

मैं यहाँ अपनी प्यास बुझाने आया हूँ,
वहीं बूंदे उसके लबों से पीने आया हूँ!

– Funadrius

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Savaal Hai (Poem)

दर वीरान है और दस्तक का सूना हाल है,
शहर मे मकान तो है, पर घर का सवाल है|

खुले उजाले मे बस्ते अंधेरे का ख़याल है,
हँसना आता तो है, पर हँसी खिलने का सवाल है|

रात को नींद नही पर दिन से लड़ने की मज़ाल है,
सीने मे दिल तो है, पर धड़कन का सवाल है|

रास्ते है कहीं, और अकेले चलने का काल है,
लोग पहचानते तो है, पर अपनो का सवाल है|

ज़िंदगी का यह एक ऐसा मायाजाल है,
तन्हाई तो है, पर जीने का सवाल है|

– Funadrius

Ek Khoj (Poem)

किसीसे मन की बात कहकर भी;
तन्हाई का इक इक पल सताता है|
भीड़ के बीच रहकर भी;
मुझे अकेला रहना आता है|

रहता है वो किसमे, कैसे, कहाँ;
कौन जाने प्यार कहाँ बस्ता है?
क्या अकेलेपन से भरे जहाँ मे;
वो लूका छिप्पि खेल कर हस्ता है?

ढूंढता हूँ उसे हर जगह;
जला धूप मैं, देखे हर साए|
ना जान पाया मई वो वजह;
क्यू वह मुझे ऐसे सताए|

मिला वो कहीं पल दो पल;
पूछना चाहा उसे सवाल कहीं|
जवाब मिले कोई, मिले कुछ हल,
पर खोज मेरी रही वहीं के वहीं|

जो लफ्ज़ उसने कहे;
वह सिर्फ़ मुझे घाव दे गये|
जो लफ्ज़ उसने ना कहे;
वह मेरी जान ले गये!

– Funadrius