Poetry

Ek Aur Kitaab Likhunga

एक और किताब लिखूंगा,
उसमे ज़्यादा नही लिखूंगा..

बस चलती साँसों का हिसाब लिखूंगा,
उनके बीच आई हर याद लिखूंगा..

बहते रक्त की फरियाद लिखूंगा,
जो बह ना पाया वो दर्द लिखूंगा..

कटी हुई ज़बान का अफ़साना लिखूंगा;
जो कह ना सका वो जज़्बात लिखूंगा..

खोई हुई नज़रों का ठिकाना लिखूंगा,
जो देख ना पाया वो ख्वाब लिखूंगा..

थके हुए कदमों का सफ़र लिखूंगा,
जो पा न सका वो मंज़िल लिखूंगा..

टूटे हुए अरमानो का जनाज़ा लिखूंगा,
अधूरे रहे सपनो की तजल्ली लिखूंगा..

एक और किताब लिखूंगा,
उसमे ज़्यादा कुछ नही लिखूंगा..
आँसुओ की स्याही से लिखूंगा,
जो जी ना पाया वो ज़िंदगी लिखूंगा..

– Funadrius

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Poetry

Main Yahaan Aya Hoon

मैं यहाँ अपने आप को खोजने आया हूँ,
उसके शहर की एक शाम चुराने आया हूँ!

मैं यहाँ अपने गीत सुनाने आया हूँ,
उसकी शाम मे एक पल बिताने आया हूँ!

मई यहाँ अपने ख्वाब साकार करने आया हूँ,
उस एक पल मे ज़िंदगी जीने आया हूँ!

मैं यहाँ अपना मॅन भरने आया हूँ,
अपनी ज़िंदगी मे उसके रंग भरने आया हूँ!

मैं यहाँ एक मासूम होली खेलने आया हूँ,
उन्ही रंगों को उसके चेहरे पे लगाने आया हूँ!

मई यहाँ कुछ महसूस करने आया हूँ,
उसके चेहरे पे गिरी बारिश की बूँदो को निहारने आया हूँ!

मैं यहाँ अपनी प्यास बुझाने आया हूँ,
वहीं बूंदे उसके लबों से पीने आया हूँ!

– Funadrius

Poetry

Savaal Hai (Poem)

दर वीरान है और दस्तक का सूना हाल है,
शहर मे मकान तो है, पर घर का सवाल है|

खुले उजाले मे बस्ते अंधेरे का ख़याल है,
हँसना आता तो है, पर हँसी खिलने का सवाल है|

रात को नींद नही पर दिन से लड़ने की मज़ाल है,
सीने मे दिल तो है, पर धड़कन का सवाल है|

रास्ते है कहीं, और अकेले चलने का काल है,
लोग पहचानते तो है, पर अपनो का सवाल है|

ज़िंदगी का यह एक ऐसा मायाजाल है,
तन्हाई तो है, पर जीने का सवाल है|

– Funadrius